जखनार मंदिर में आयोजित देवी भागवत कथा सुनने पंहुचे क्षेत्र के सैकड़ों भक्त

 

Hundreds of devotees from the area reached to listen to Devi Bhagwat Katha organized in Jakhanar temple.

 

-भानु प्रकाश नेगी,
चमोलीेेेेेःजखनार मंदिर समिति कुंजाउ-मैकोट द्वारा आयोजित दिव्य श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण के पांचवें दिन क्षेत्र के अनेक गांवो से पधारे भक्तों का दिन भर तांता लगा रहा। प्रातःकालीन पंचाग पूजन के बाद नित्य महायज्ञ का कार्यक्रम जारी रहा। इस दौरान रौली ग्वाड़,सगर,गगोल,देवलधार,स्यूंण समेत अनेक गांवों के भक्तों द्वारा अपने अपने ईष्ट देवता की भेंट जखनार मंदिर में अर्पित गई। वहीं कुजाउ मैकोट की महिला मंगलदल व युवाओं के द्वारा आगंतुक मेहमानों का फूल मालाओं से स्वागत सत्कार किया गया। इस दौरान विभिन्न गांवां से पधारे अनेक देवी देवताओं के पश्वाओं ने देव शक्ति का प्रर्दशन किया। भारी संख्या में पधारे भक्तों ने जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान महिलाओं के द्वारा झूमैेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेलो नृत्य भी किया गया।


देवी भागवत कथा महा पुराण के पांचवें दिन कुजाउं मल्ला के मां कुलदेवी भण्डारी बंधु द्वारा विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं के द्वारा भण्डारें में भरपूर सहयोग दिया गया व अतिथियों की जमकार आवाभगत की गई।
वही कथा व्यास आचार्य वेद प्रकाश(महादेव जी) ने देवी भागवत कथा के दौरान मॉ जगदम्बा के अनेक रूपों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मॉ पराम्बा जगदम्बा की कृपा से ही यह संम्पूर्ण सृष्टि का पालन,सृजन व संघार हो रहा है। बिना भगवती की कृपा से शिव के दर्शन नहीं हो सकते है। मां भगवती की कृपा से ही इन्द्रियां पर नियंत्रण होता है। भगवान शिव को भगवती का नवारण मंत्र ले जाता है। बिना गुरू दीक्षा के मंत्र आपके नास का कारक बन सकता है। कलयुग के देवता हनुमान का सुमिरन हमेसा करना चाहिए ताकि आप जीवन के सद्मार्ग पर चल सको। किसी की निन्दा करने से स्यंम का नास होता है। खुद की निंदा करने से यश की प्राप्ति होती है। और सत,रज,तम तीनों गुणों पर नियंत्रण होता है।
देवी भागवत कथा के दौरान मां भगवती की सुन्दर झांकी भी निकाली गई जिस पर भक्त मंत्र मुग्ध होकर झूमने लगे। संगीतमय कथा के दौरान लोकगायक प्रदीप बुटोला व साथियों ने मां भगवती तू दर्शन दें,जय जय हो बद्रीनाथ, समेत अनेक भजन गाये। जिस पर भक्तों ने जमकर नृत्य भी किया।


कथा के दौरान रूद्रनाथ के पुजारी हरीश भट्ट,पूर्व दसोली प्रमुख भगत सिंह विष्ट,नंदन सिंह बिष्ट समेत अनेक गणमान्य लोगों ने सिरकत की।