जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली में त्रैमासिक समीक्षा बैठक का हुआ आयोजन
गौचर/चमोली। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चमोली, गौचर में त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से खंड शिक्षा अधिकारियों, ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी), क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के संकाय सदस्यों ने प्रतिभाग किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में संचालित विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की समीक्षा करना तथा आगामी शैक्षिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों के मध्य समन्वय स्थापित करना रहा।
बैठक में रूम टू रीड संस्था से अनीता चंदोला एवं उमाशंकर ने भी प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त जनपद के शिक्षक संगठनों की सहभागिता भी बैठक में रही। प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ एवं राजकीय शिक्षक संघ के जनपद स्तरीय प्रतिनिधियों ने बैठक में उपस्थित रहकर शिक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के संकाय सदस्य एवं नियोजन एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कठैत द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनुमोदित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की गई। उन्होंने संस्थान एवं जनपद स्तर पर संपादित कार्यक्रमों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया। विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की प्रगति पर चर्चा करते हुए आगामी कार्यक्रमों को निर्धारित समयावधि में प्रभावी ढंग से संपादित करने पर बल दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने बच्चों की शैक्षिक दक्षताओं एवं सीखने के प्रतिफलों को शिक्षा की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में केवल पाठ्यक्रम को पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रत्येक बालक निर्धारित दक्षताओं को प्राप्त करे और उसके सीखने के स्तर में निरंतर सुधार दिखाई दे।
प्राचार्य आकाश सारस्वत ने परख, पहल एवं स्लैस सर्वे सहित विभिन्न शैक्षिक आकलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सर्वेक्षणों एवं आकलनों से प्राप्त परिणामों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाना चाहिए। जहां बच्चों की दक्षताओं एवं सीखने के प्रतिफलों में कमी दिखाई दे रही है, वहां सुनियोजित रणनीति बनाकर सुधारात्मक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरपी, सीआरपी एवं शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर नियमित अनुश्रवण एवं शैक्षणिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
प्राचार्य ने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम का विशेष उल्लेख करते हुए जनपद के सभी पात्र विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, विचार एवं क्षमता प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करते हैं। इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों को समन्वित प्रयास करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
बैठक में संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी ने परख सर्वेक्षण के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परख सर्वेक्षण के अंतर्गत कक्षा 3, कक्षा 6 एवं कक्षा 9 के विद्यार्थियों का आकलन किया जाता है। ये कक्षाएं क्रमशः मूलभूत, प्रारंभिक एवं मिडिल स्तर के पश्चात बच्चों की सीखने की स्थिति को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन कक्षाओं में होने वाले आकलन से विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षिक उपलब्धि तथा विभिन्न विषयों में उनकी दक्षताओं का आकलन करने में सहायता मिलती है।
राजेंद्र प्रसाद मैखुरी ने सीखने के प्रतिफलों एवं दक्षताओं के संबंध में विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। आकलन के परिणामों के आधार पर बच्चों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने तथा कमजोर दक्षताओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थित शिक्षा अधिकारियों एवं शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर निरंतर अभ्यास, पुनर्बलन एवं सुधारात्मक शिक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।
बैठक में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपद महामंत्री मुकेश नेगी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सती, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंत्री विक्रम गोसाईं तथा राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रकाश चौहान ने शिक्षा एवं शिक्षकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। प्रतिनिधियों ने शैक्षिक कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका, विद्यालयों की आवश्यकताओं तथा विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित हुआ तथा जनपद में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की गई। यह भी अपेक्षा की गई कि सभी विकासखंडों में शैक्षिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का प्रभावी अनुश्रवण किया जाएगा तथा बच्चों के सीखने के प्रतिफलों में सुधार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।
त्रैमासिक समीक्षा बैठक का संचालन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के नियोजन एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कठैत द्वारा किया गया। बैठक में जनपद की शैक्षिक गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सभी प्रतिभागियों ने शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार, विद्यार्थियों की दक्षताओं के विकास तथा निर्धारित कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी पोखरी नेहा भट्ट द्वारा भी शैक्षिक स्तर सुधारने पर अपनी बात रखी गई,
