गरीब परिवार की छात्रा का विज्ञान मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चयनित, पेटेंट भी हुआ; बिखौती कर्ण महोत्सव में हुआ सम्मान
कर्णप्रयाग: चमोली जनपद के कर्णप्रयाग स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की कक्षा 12 की छात्रा महक अंसारी ने अपनी प्रतिभा के दम पर न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली महक ने राष्ट्रीय स्तर की बाल विज्ञान प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है।
महक द्वारा तैयार किया गया विज्ञान मॉडल पहले राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-25 में चयनित हुआ, जिसके बाद इस मॉडल का पेटेंट भी कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि सीमित संसाधनों के बावजूद महक ने यह मुकाम हासिल किया है।
इस उपलब्धि के बाद महक को 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर देश के सर्वोच्च सदन लोकसभा में भाषण देने का अवसर मिला। खास बात यह रही कि महक ने वहां उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में गढ़वाली लोकभाषा में अपना भाषण दिया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया और प्रदेश की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
महक अंसारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हुए कहा कि लोकसभा में गढ़वाली भाषा में भाषण देना उनके लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही वह इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं।
वहीं, महक की मां संजीदा बेगम ने बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद महक ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज यह सफलता हासिल की। उन्होंने प्रशासन से बेटी की आगे की पढ़ाई और परिवार की स्थिति को देखते हुए आर्थिक सहायता, पेंशन अथवा आवास की मांग भी की है।
महक की इस उपलब्धि के बाद पूरे कर्णप्रयाग क्षेत्र सहित जनपद और प्रदेश में खुशी का माहौल है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी महक की सराहना की जा रही है।
इसी क्रम में नगर पालिका परिषद कर्णप्रयाग द्वारा आयोजित बिखौती कर्ण महोत्सव के दौरान महक अंसारी को मंच पर सम्मानित किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष गणेश शाह ने कहा कि महक को पिछले वर्ष भी इसी मंच से प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला था और आज उसकी यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
महक अंसारी की यह सफलता न केवल क्षेत्र की अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणा बनी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।
