Chhidiya Vidyalaya engaged in the promotion of Sanskrit, every activity of the prayer meeting is in Sanskrit
संस्कृतमय हुई राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया की प्रार्थना सभा
चमोली का एकमात्र विद्यालय होने का दावा, प्रार्थना सभा की सभी गतिविधियां संस्कृत में संचालित
गैरसैंण (चमोली)। जनपद चमोली के विकासखंड गैरसैंण के सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार की दिशा में अनूठी पहल कर रहा है। विद्यालय में विद्यार्थियों की प्रार्थना सभा पूरी तरह संस्कृत भाषा में संचालित की जा रही है। विद्यालय परिवार के अनुसार, यह जनपद का एकमात्र विद्यालय है, जहां प्रार्थना सभा की सभी गतिविधियां संस्कृत में आयोजित होती हैं।

विद्यालय में बच्चों की संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। प्रार्थना सभा में सरस्वती वंदना, प्रार्थना, समूह गान, प्रतिज्ञा, भारतीय संविधान की प्रस्तावना, कहानी, समाचार वाचन और सामान्य ज्ञान जैसी गतिविधियां संस्कृत भाषा में कराई जा रही हैं। इसके साथ ही 50 संस्कृत श्लोकों पर आधारित सुभाषितों का अभ्यास भी कराया जा रहा है।
विद्यालय में इन गतिविधियों को संगीत, ताल, छंद और लय के समन्वय से रोचक बनाया गया है। शिक्षक सामूहिक रूप से बच्चों को संस्कृत श्लोकों और प्रार्थनाओं का अभ्यास करा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनके उच्चारण कौशल, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यालय का उद्देश्य केवल संस्कृत भाषा का ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि इसे बच्चों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाना भी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित विद्यालय की इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विद्यालय परिवार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति लगाव बढ़ाने के साथ अन्य विद्यालयों को भी प्रेरित कर सकती हैं।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक रमेश चन्द्र निराला के नेतृत्व में सहायक अध्यापक नागेन्द्र कुमार, विजय बल्लभ चमोली, श्रीमती रंजना लसियाल और जमन राम लोहानी इस पहल में सहयोग कर रहे हैं।
विद्यालय परिवार का कहना है कि संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा से परिचित कराना इस प्रयास का प्रमुख उद्देश्य है।
