हंसलोक आश्रम में श्री भोले जी महाराज के जन्मोत्सव पर विशाल जनकल्याण समारोह आरंभ

Massive public welfare function begins at Hanslok Ashram on the occasion of birth anniversary of Shri Bhole Ji Maharaj

 

श्री भोले जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर विशाल जनकल्याण समारोह शुरू।

अध्यात्म ज्ञान से ही समाज में बदलाव संभव–माताश्री मंगला जी।

नई दिल्ली। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं द हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत श्री भोले जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर श्री हंसलोक आश्रम, छतरपुर में तीन दिवसीय विशाल जनकल्याण समारोह का विधि विधान के साथ शुभारम्भ हुआ। हंस ज्योति-ए यूनिट आफ हंस कल्चरल सेंटर, दिल्ली द्वारा आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा बिहार‌ आदि अनेक‌ राज्यों के अलावा कई अन्य देशों के श्रद्धालु-भक्त बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।

इस मौके पर आध्यात्मिक विभूति माताश्री मंगला जी ने कहा कि हमारा देश भगवान श्री राम, भगवान श्री कृष्ण, भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरु नानक, स्वामी विवेकानंद, श्री हंस जी महाराज तथा छत्रपति शिवाजी जैसे अनेक संत-महापुरुषों की जन्मभूमि रहा है। ये सभी संत-महापुरुष आध्यात्मिक थे जिन्होंने स्वयं भी हृदय स्थित भगवान के सच्चे नाम को जानकर भजन-सुमरिण किया तथा उस समय के लोगों को अध्यात्म ज्ञान का बोध कराकर उनकी आत्मिक चेतना को जगाया।

माताश्री मंगला जी ने कहा कि आज हमारा समाज संत-महापुरुषों द्वारा दिखाये अध्यात्म ज्ञान के मार्ग से विमुख होता जा रहा है जिस कारण चारों तरफ अराजकता, हिंसा, अशांति तथा व्यभिचार बढ़ता जा रहा है। देश के अनेक युवा नशीली वस्तुओं का सेवन कर अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं, जो बहुत ही चिंता का विषय है।माता श्री मंगला जी ने समारोह में उपस्थित श्रद्धालु-भक्तों का आहवान किया कि वे स्वंय भी अध्यात्म ज्ञान को जानकर भजन-सुमिरण करें तथा अपने बच्चों को भी अध्यात्म ज्ञान से जोड़कर उन्हें संस्कारवान एवं चरित्रवान बनायें। उन्होंने कहा कि अध्यात्म ज्ञान के व्यापक प्रचार-प्रसार से ही समाज में रचनात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

इस मौके पर श्री भोले जी महाराज ने मानव जन्म को अनमोल बताते हुए कहा कि यह शरीर हमें भगवान के भजन, भक्ति और सेवा के लिए मिला है। इसे व्यर्थ की बातों में नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने–सुनो सुनों वचन नर नारी, हरि भजन करो सुखकारी तथा–मानुष जनम अनमोल रे–आदि भजनों की प्रस्तुति कर लोगों को अध्यात्म ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जनकल्याण समारोह में देश के विभिन्न तीर्थों से आये कई संत-महात्माओं ने भी सत्संग विचारों से श्रद्धालु-भक्तों को लाभान्वित किया। भजन गायकों ने भक्ति भाव से जुड़े भजनों की प्रस्तुति कर लोगों को आनंद से सराबोर कर दिया।