बाल किडनी रोगों के उपचार में दक्षता बढ़ाने हेतु एसजीआरआरआईएमएचएस में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला

National-level workshop at SGRRIMHS to enhance expertise in the treatment of pediatric kidney diseases

 

एसजीआरआरआईएमएचएस में आयोजित
हुई 6वीं पीडी-टेम कार्यशाला

बाल किडनी आपात चिकित्सा सेवाओं को सशक्त बनाने पर विशेषज्ञों का जोर

 

देहरादून। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एसजीआरआरआईएमएचएस), देहरादून के बाल रोग विभाग द्वारा 20 एवं 21 जून को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की 6वीं पीडियाट्रिक डायलिसिस एंड थेरेप्यूटिक एफेरेसिस मॉड्यूल फॉर इमरजेंसी (पीडी-टेम) कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए बाल रोग विशेषज्ञों, नेफ्रोलॉजिस्टों और चिकित्सा शिक्षकों ने भाग लेकर बच्चों में किडनी संबंधी गंभीर एवं आपातकालीन बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम ज्ञान और तकनीकों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन से श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्राचार्य डाॅ उत्कर्ष शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ अनिल मलिक, चिकित्सा अधीक्षक डाॅ वीरेन्द्र वर्मा, विभागाध्यक्ष शिशु रोग विभाग, डाॅ विशाल कौशिक, श्री मंहत इन्दिरेश अस्पताल की वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ रागिनी सिंह, शिशु रोग विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, बीएचयू डाॅ ओपी मिश्रा एवम् निदेशक लेडी हार्डिंग मेडिकल काॅलेज, नई दिल्ली के डाॅ अभिजीत सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में तीव्र गुर्दा विकार (एक्यूट किडनी इंजरी), डायलिसिस तथा थेरेप्यूटिक एफेरेसिस जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं के प्रति चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाना था। विशेषज्ञों ने हैंड्स-ऑन सिमुलेशन, मानकीकृत प्रोटोकॉल और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के कोर्स डायरेक्टर एवं बाल नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत साहा ने कहा कि उत्तराखंड में बच्चों की डायलिसिस संबंधी यह पहला व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों को पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस का प्रशिक्षण मिलने से बच्चों का समय पर उपचार संभव होगा और उन्हें महानगरों के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता कम होगी।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) ओ. पी. मिश्रा ने हीमोडायलिसिस एवं थेरेप्यूटिक एफेरेसिस पर विशेषज्ञ व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रत्येक पीडियाट्रिक्स स्नातकोत्तर चिकित्सक को इन जीवनरक्षक प्रक्रियाओं का मूलभूत ज्ञान होना चाहिए। गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार में ये कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली से आईं डॉ. प्रेरणा बत्रा ने गंभीर किडनी रोग से पीड़ित बच्चों में पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासोनोग्राफी (पीओकस) तथा मैकेनिकल वेंटिलेशन पर प्रशिक्षण दिया। वहीं, आधारशिला ट्रस्ट की ट्रस्टी नीना जॉली ने कहा कि देश के अनेक जिलों में बच्चों में एक्यूट किडनी इंजरी की समय पर पहचान और उपचार सुविधाओं का अभाव गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का जीवन विशेषज्ञ की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि पहले स्वास्थ्यकर्मी के प्रशिक्षण पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
आयोजकों के अनुसार पीडी-टेम पहल के अंतर्गत अब तक देशभर में 300 से अधिक चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस कार्यक्रम से बच्चों में किडनी रोगों के उपचार, अस्पतालों की आपातकालीन तैयारी तथा समय पर हस्तक्षेप की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज़ के प्राचार्य प्रो. (डाॅ) उत्कर्ष शर्मा ने कार्यशाला में आए सभी फैकल्टी एवम् सभी आगन्तुकों को किडनी सम्बन्धित बीमारियों, उनके रोकथाम एवम् उनके सफल उपचार के बारे में ज्ञान सांझा किया।
इस कार्यशाला के लिए डाॅ विशाल कौशिक, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने सभी जरूरी व्यवस्थाओं की देखरेख की एवम् सफल आयोजन हेतु आवश्यक समन्वय बनाया।