Rudraprayag’s brave son Havildar Ravindra Singh Rana martyred while protecting the motherland in Arunachal
रूद्रप्रयाग: भारतीय सेना के 15 गढ़वाल राइफल्स के हवलदार रविन्द्र सिंह राणा शहीद — देश के लिए सर्वोच्च बलिदान
रूद्रप्रयाग, उत्तराखंड – भारतीय सेना के 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात हवलदार रविन्द्र सिंह पुत्र सत्येंद्र सिंह राणा (पूर्व प्रधान, आगर दशज्यूला, रूद्रप्रयाग) ने अरुणाचल प्रदेश में भारत मां की सेवा करते हुए वीरताFULL शहादत प्राप्त की है। यह अत्यंत दुखद और हृदयविदारक समाचार स्वीकृत सूत्रों से प्राप्त हुआ है।
भारतीय सेना द्वारा जारी प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार, हवलदार रविन्द्र सिंह को वर्तमान पढ़ाई-लिखाई तथा तैनाती का कार्य अरुणाचल प्रदेश सीमा पर मिला हुआ था, जहां उन्होंने कर्तव्य के निर्वाहन के दौरान आतंकवादियों/शत्रु तत्वों से मुकाबले में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वीरता और समर्पण का इतिहास सदैव याद रखा जाएगा।
शहादत का मामला
घटना उस समय हुई जब सैनिक दल ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर भूमि सुरक्षा अभियान चलाया। तत्पश्चात लगभग हुए आमने-सामने की मुठभेड़ में हवलदार रविन्द्र सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की, लेकिन इस संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल लाया गया, जहाँ उपचार के बावजूद उन्होंने अपनी अंतिम सांस देश सेवा के लिये लगा दी।
सेना के बयान में कहा गया है:
“हवलदार रविन्द्र सिंह का बलिदान हमें भारत मां के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सच्ची सीख देता है। उनके साहस और वीरता को सलाम।”
पृष्ठभूमि: रविन्द्र सिंह राणा
हवलदार रविन्द्र सिंह राणा मूल रूप से रूद्रप्रयाग जिले के आगर दशज्यूला गांव से थे। उनके पिता श्री सत्येंद्र सिंह राणा पूर्व प्रधान रह चुके हैं। परिवार जन बताते हैं कि रविन्द्र बचपन से ही देशभक्ति और सेना में सेवा की चाह रखते थे। उन्होंने जल्द ही 15 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर सीमा सुरक्षा की शपथ ली और देश की सेवा में जुट गये।
परिवार में शोक की लहर
शहादत की खबर मिलते ही राणा परिवार में कोहराम मच गया। घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि
“हमारा बेटा हमेशा ही मर्यादा, सम्मान और देशभक्ति के लिये प्रसिद्ध था। भगवान उसे सर्वोच्च स्थान दें।”
स्थानीय ग्रामीण, मित्र तथा सेना के साथी सम्मान देने पहुंचे और परिवार के साथ खड़े नजर आये।
राज्य और प्रशासन की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। सरकार उनके परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दे चुकी है। साथ ही शहीद सैनिक को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की तैयारियाँ भी जारी हैं।
देश के लिये सर्वोच्च बलिदान
हवलदार रविन्द्र सिंह राणा की शहादत भारत के उन अनगिनत अप्रकाशित हीरों की कहानी है, जिन्होंने सीमा पर निडरता से देश की रक्षा की। उनकी वीरता, निष्ठा और बलिदान हमेशा भारतीय सेना तथा राष्ट्र की आत्मा में प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
